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Ch 24औपचारिक पत्र लेखन

व्याकरण एवं लेखन

औपचारिक पत्र लेखन

परिभाषा और महत्त्व

जो पत्र कार्यालयी, व्यावसायिक या सार्वजनिक कार्यों के लिए अधिकारियों, संपादकों, प्रधानाचार्यों, संस्थाओं आदि को लिखे जाते हैं, वे औपचारिक पत्र कहलाते हैं। इनमें व्यक्तिगत आत्मीयता नहीं होती — भाषा शिष्ट, संयमित और सधी हुई होती है तथा बात सीधे और संक्षेप में कही जाती है। शिकायत, प्रार्थना, अनुरोध, सुझाव, आवेदन, संपादक के नाम पत्र — ये सब औपचारिक पत्र के ही रूप हैं। डिजिटल युग में भी औपचारिक पत्र-लेखन का महत्त्व बना हुआ है, क्योंकि सरकारी और व्यावसायिक कामकाज आज भी लिखित आवेदन से ही चलता है।

औपचारिक पत्र के प्रकार

  • प्रार्थना-पत्र: प्रधानाचार्य को अवकाश, शुल्क-मुक्ति, चरित्र-प्रमाणपत्र, विषय-परिवर्तन आदि के लिए।
  • शिकायती पत्र: नगर निगम, डाक अधिकारी, पुलिस, बिजली/जल विभाग आदि को समस्याओं के लिए।
  • संपादक के नाम पत्र: समाचार-पत्र के माध्यम से किसी सार्वजनिक समस्या की ओर ध्यान दिलाने के लिए।
  • व्यावसायिक पत्र: पुस्तक-विक्रेता, कंपनी आदि को सामान मँगवाने या शिकायत के लिए।
  • आवेदन-पत्र: नौकरी आदि के लिए।

CBSE कोर्स B (2026-27) — अंक-विभाजन व शब्द-सीमा

बिंदुविवरण
अंक5 अंक
शब्द-सीमालगभग 100 शब्द
विकल्पदो विषयों में से किसी एक पर औपचारिक पत्र
अंक-योजना (लगभग)प्रारूप/औपचारिकताएँ 1 + विषय-वस्तु 2 + प्रस्तुति 1 + भाषा 1

औपचारिक पत्र का प्रारूप (क्रम से)

  1. प्रेषक का पता: सबसे ऊपर बाईं ओर। परीक्षा में अपना वास्तविक नाम-पता न लिखकर 'परीक्षा भवन' लिखें (जब तक प्रश्न में कोई काल्पनिक नाम/स्थान न दिया हो)।
  2. दिनांक: पते के ठीक नीचे। जैसे — दिनांक : 12 मार्च, 20XX
  3. प्राप्तकर्ता का पदनाम व पता: 'सेवा में' लिखकर, जैसे — सेवा में, प्रधानाचार्य महोदय, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, मधुबनी।
  4. विषय: एक पंक्ति में पत्र का सार। यह पढ़ते ही पत्र का प्रयोजन स्पष्ट हो जाना चाहिए।
  5. संबोधन: महोदय / महोदया / मान्यवर।
  6. मुख्य विषय-वस्तु: प्रायः दो-तीन अनुच्छेद — (क) प्रयोजन/समस्या का कथन, (ख) विवरण/कारण, (ग) प्रार्थना/समाधान की अपेक्षा व धन्यवाद।
  7. समापन-शिष्टता (स्वनिर्देश): भवदीय / भवदीया / प्रार्थी / आपका आज्ञाकारी शिष्य।
  8. प्रेषक का नाम: क, ख, ग (परीक्षा में) अथवा प्रश्न में दिया गया नाम। विद्यालय के पत्र में कक्षा/अनुक्रमांक भी।

हल उदाहरण 1 — प्रधानाचार्य को अवकाश हेतु प्रार्थना-पत्र

परीक्षा भवन
क.ख.ग. विद्यालय
दिल्ली।

दिनांक : 10 अगस्त, 20XX

सेवा में,
प्रधानाचार्य महोदय,
क.ख.ग. विद्यालय,
दिल्ली।

विषय : तीन दिन के अवकाश हेतु प्रार्थना-पत्र।

महोदय,

सविनय निवेदन है कि मैं आपके विद्यालय की कक्षा दसवीं 'ब' का छात्र हूँ। कल शाम से मुझे तेज़ बुखार और सिरदर्द है। चिकित्सक ने मलेरिया की आशंका जताते हुए मुझे तीन दिन पूर्ण विश्राम की सलाह दी है। इस कारण मैं विद्यालय आने में असमर्थ हूँ।

अतः आपसे विनम्र प्रार्थना है कि मुझे दिनांक 10 अगस्त से 12 अगस्त, 20XX तक तीन दिन का अवकाश प्रदान करने की कृपा करें। मैं स्वस्थ होते ही छूटा हुआ पाठ्यक्रम पूरा कर लूँगा। इसके लिए मैं आपका आभारी रहूँगा।

धन्यवाद सहित।

आपका आज्ञाकारी शिष्य
क.ख.ग.
कक्षा — दसवीं 'ब', अनुक्रमांक — 15

हल उदाहरण 2 — संपादक के नाम पत्र (मोहल्ले में जलभराव की समस्या)

परीक्षा भवन
नई दिल्ली।

दिनांक : 18 जुलाई, 20XX

सेवा में,
संपादक महोदय,
नवभारत टाइम्स,
नई दिल्ली।

विषय : मोहल्ले में जलभराव की समस्या की ओर संबंधित अधिकारियों का ध्यान आकर्षित करने हेतु।

महोदय,

मैं आपके प्रतिष्ठित समाचार-पत्र के माध्यम से नगर निगम के अधिकारियों का ध्यान अपने क्षेत्र की जलभराव की गंभीर समस्या की ओर दिलाना चाहता हूँ।

वर्षा ऋतु आरंभ होते ही हमारे क्षेत्र की सड़कों और गलियों में घुटनों तक पानी भर जाता है। नालियाँ कचरे से अवरुद्ध हैं और महीनों से उनकी सफ़ाई नहीं हुई है। गंदे पानी के कारण मच्छर पनप रहे हैं और डेंगू-मलेरिया फैलने का खतरा बढ़ गया है। विद्यालय जाते बच्चे और वृद्धजन आए दिन फिसलकर चोटिल हो रहे हैं। अनेक शिकायतों के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

आशा है कि आपके समाचार-पत्र में यह पत्र प्रकाशित होने पर संबंधित विभाग शीघ्र नालियों की सफ़ाई और जल-निकासी की समुचित व्यवस्था कराएगा।

धन्यवाद सहित।

भवदीय
क.ख.ग.

ध्यान रखने योग्य बातें

  • भाषा शिष्ट और औपचारिक रखें — 'सविनय निवेदन है', 'आपसे प्रार्थना है', 'कृपा करें' जैसे शब्दों का प्रयोग करें।
  • विषय-पंक्ति अनिवार्य है — इसे छोड़ने पर प्रारूप के अंक कटते हैं।
  • बात सीधी और संक्षिप्त रखें; भावुकता, इधर-उधर की बातें और अनावश्यक विस्तार न करें।
  • पत्र का उद्देश्य (प्रार्थना/शिकायत/सुझाव) अंतिम अनुच्छेद में स्पष्ट रूप से लिखें।
  • समापन में धन्यवाद और उपयुक्त स्वनिर्देश (भवदीय/प्रार्थी) अवश्य लिखें।
  • परीक्षा में वास्तविक नाम-पता कभी न लिखें — 'परीक्षा भवन' और 'क.ख.ग.' का ही प्रयोग करें।
परीक्षा-टिप: सबसे अधिक अंक 'विषय' और सही क्रम (पता → दिनांक → सेवा में → विषय → संबोधन → कलेवर → स्वनिर्देश) पर कटते हैं। आम गलतियाँ — विषय न लिखना, संपादक के पत्र में 'आपका आज्ञाकारी शिष्य' लिख देना (वहाँ 'भवदीय' आता है), अनौपचारिक भाषा ('प्यारे सर') का प्रयोग और शब्द-सीमा पार करना। बोर्ड में प्रायः पूछे जाने वाले पत्र — अवकाश, शुल्क-मुक्ति, पुस्तकालय में हिंदी पुस्तकें बढ़वाने, सफ़ाई-व्यवस्था, सड़क की मरम्मत, बस-सेवा और संपादक के नाम (प्रदूषण/जलभराव/ध्वनि-प्रदूषण) पत्र।