🎓TopperHub
HomeHindi (Course B)Hindi (Course B)

Ch 12गिरगिट

स्पर्श (गद्य) · अंतोन चेखव

गिरगिट — अंतोन चेखव (कहानी)

पाठ्यपुस्तक: स्पर्श भाग-2 | विधा: कहानी (रूसी कहानी का हिंदी अनुवाद) | कोड 085, हिंदी पाठ्यक्रम-ब

लेखक परिचय

अंतोन चेखव (1860–1904) विश्वप्रसिद्ध रूसी कथाकार और नाटककार थे। उनका जन्म दक्षिण रूस के तगानरोग नगर में हुआ। पेशे से चिकित्सक चेखव ने छोटी-छोटी कहानियों के माध्यम से समाज की विसंगतियों, सरकारी तंत्र की चाटुकारिता और मनुष्य के दोहरे चरित्र पर तीखा पर सधा हुआ व्यंग्य किया। 'गिरगिट', 'क्लर्क की मौत', 'वान्का' जैसी कहानियाँ तथा 'चेरी का बगीचा', 'तीन बहनें', 'सीगल' जैसे नाटक उनकी अमर कृतियाँ हैं। कम शब्दों में गहरी चोट करना उनकी शैली की सबसे बड़ी विशेषता है।

विस्तृत सारांश

1. घटना की शुरुआत — बाज़ार का दृश्य

पुलिस इंस्पेक्टर ओचुमेलॉव नया ओवरकोट पहने, हाथ में बंडल लिए बाज़ार के चौराहे से गुज़र रहा है। उसके पीछे लाल बालों वाला सिपाही येल्दीरीन ज़ब्त की हुई झरबेरियों से भरी टोकरी लिए चल रहा है। चारों ओर सन्नाटा है — दुकानों के खुले दरवाज़े भूखे मुँहों की तरह खुले हैं, आस-पास एक भिखारी तक नहीं है। तभी अचानक कुत्ते की किकियाहट और आदमी की चीख सुनाई देती है — "मत जाने दो! पकड़ लो!"

2. ख्यूक्रिन और कुत्ता

सुनार ख्यूक्रिन एक पिल्ले (बारजोई नस्ल के सफ़ेद कुत्ते) का पिछला पैर पकड़े लकड़ी के गोदाम से बाहर निकलता है। कुत्ते ने उसकी उँगली काट खाई है। ख्यूक्रिन खून से सनी उँगली ऊपर उठाकर भीड़ को दिखाता है — मानो वह विजय-पताका हो। उसका कहना है कि वह मेहनत-मज़दूरी करने वाला आदमी है, उँगली ख़राब हो जाने से हफ़्तों काम नहीं कर पाएगा, इसलिए उसे हर्जाना मिलना चाहिए। कानून में यह नहीं लिखा कि कोई जानवर लोगों को काटता फिरे। देखते-ही-देखते भीड़ जमा हो जाती है।

3. ओचुमेलॉव के रंग बदलने का सिलसिला

ओचुमेलॉव पहले तो पूरी कड़क के साथ न्याय की बात करता है — कुत्ते के मालिक पर जुर्माना ठोकने और कुत्ते को मार डालने की धमकी देता है। पर जैसे ही भीड़ में से कोई कहता है कि यह कुत्ता जनरल झिगालॉव का है, उसका रंग बदल जाता है। इसके बाद कुत्ते के मालिक को लेकर अटकलें बदलती रहती हैं और हर बार ओचुमेलॉव का 'न्याय' पलटता रहता है —

  • कुत्ता साधारण है → कुत्ता आवारा है, इसे ख़त्म कर दो; ख्यूक्रिन बेचारा पीड़ित है।
  • कुत्ता जनरल का है → इतना छोटा कुत्ता भला इतने बड़े आदमी की उँगली कैसे काट सकता है? ज़रूर ख्यूक्रिन ने जलती सिगरेट से इसकी नाक जलाई होगी; वह हर्जाने के लालच में झूठ बोल रहा है।
  • गरमी-सरदी के बहाने वह बार-बार कोट उतरवाता और पहनता है — यह उसकी भीतरी घबराहट और बदलते रुख़ का प्रतीक है।

4. बावर्ची का आगमन और फ़ैसला

तभी जनरल का बावर्ची प्रोखोर वहाँ आता है। वह बताता है कि यह कुत्ता जनरल झिगालॉव का नहीं है — जनरल के भाई इवानिच का है, जो हाल ही में आए हैं। यह सुनते ही ओचुमेलॉव के चेहरे पर मुसकान दौड़ जाती है। वह कुत्ते को 'नन्हा-सा शैतान', 'खूबसूरत डॉगी' कहकर पुचकारने लगता है और प्रोखोर के हाथों उसे भिजवा देता है। अंत में वह ख्यूक्रिन को ही धमकाता है — "मैं तुझे देख लूँगा!" — और भीड़ ख्यूक्रिन पर हँसने लगती है। ओचुमेलॉव अपने ओवरकोट में लिपटकर बाज़ार के रास्ते चला जाता है।

शीर्षक की सार्थकता — 'गिरगिट' क्यों?

गिरगिट परिस्थिति के अनुसार अपना रंग बदलता है। ओचुमेलॉव भी कुत्ते के मालिक की हैसियत के अनुसार बार-बार अपना निर्णय, व्यवहार और भाषा बदलता है — कभी ख्यूक्रिन पीड़ित है, कभी अपराधी; कभी कुत्ता आवारा है, कभी 'प्यारा डॉगी'। अतः यह शीर्षक प्रतीकात्मक और पूर्णतः सार्थक है — यह उन अवसरवादी, चाटुकार अधिकारियों पर व्यंग्य है जिनके लिए न्याय नहीं, ताक़तवर की खुशामद ही सर्वोपरि है।

पात्र-परिचय

  • ओचुमेलॉव — पुलिस इंस्पेक्टर; कहानी का केंद्रीय पात्र। अवसरवादी, चापलूस, भ्रष्ट और आत्मविश्वासहीन अधिकारी। कमज़ोर पर रौब जमाता है और ताक़तवर के आगे बिछ जाता है। उसका बार-बार कोट उतारना-पहनना उसकी मानसिक उथल-पुथल का प्रतीक है।
  • ख्यूक्रिन — सुनार; कुत्ते के काटने का पीड़ित, पर अवसर देखकर हर्जाना वसूलने की जुगत में भी रहता है। अंत में व्यवस्था के हाथों अपमानित होकर रह जाता है — आम आदमी की विवशता का प्रतीक।
  • येल्दीरीन — सिपाही; इंस्पेक्टर की हाँ-में-हाँ मिलाने वाला अधीनस्थ, जो अटकलों से हवा का रुख़ बताता रहता है।
  • प्रोखोर — जनरल का बावर्ची; कुत्ते के असली मालिक (जनरल के भाई इवानिच) की जानकारी देता है।
  • जनरल झिगालॉव — कहानी में प्रत्यक्ष उपस्थित नहीं, पर उसकी सत्ता का भय पूरी कहानी की दिशा तय करता है — सत्ता के अदृश्य दबाव का प्रतीक।
  • भीड़ — तमाशबीन जनता, जो अंत में पीड़ित ख्यूक्रिन पर ही हँसती है।

संदेश / उद्देश्य

  • सत्ता और शक्ति के आगे झुकने वाली न्याय-व्यवस्था पर तीखा व्यंग्य — कानून सबके लिए समान होना चाहिए, हैसियत देखकर नहीं बदलना चाहिए।
  • चाटुकारिता, अवसरवादिता और दोहरे चरित्र वाले अधिकारियों का पर्दाफ़ाश।
  • आम आदमी की विवशता — व्यवस्था से न्याय माँगने पर भी उसे अपमान ही मिलता है।
  • तमाशबीन समाज पर भी प्रश्न — भीड़ अन्याय देखकर हँसती है, विरोध नहीं करती।
परीक्षा टिप: इस पाठ से सबसे अधिक पूछे जाने वाले प्रश्न — (1) ओचुमेलॉव ने कितनी बार और क्यों रंग बदले (क्रमवार लिखना सीखें), (2) कोट उतारने-पहनने का प्रतीकार्थ, (3) 'गिरगिट' शीर्षक की सार्थकता, (4) ख्यूक्रिन की उठी हुई उँगली 'विजय-पताका' से बदलकर अंत में क्या रह जाती है, (5) कहानी की प्रासंगिकता — आज की व्यवस्था से जोड़कर उत्तर लिखने पर पूरे अंक मिलते हैं। पात्रों के नाम की वर्तनी (ओचुमेलॉव, ख्यूक्रिन, येल्दीरीन, झिगालॉव, प्रोखोर) शुद्ध लिखें।

कठिन शब्दार्थ

शब्दअर्थ
ज़ब्तकब्ज़े में लिया हुआ
झरबेरियाँछोटे बेर (एक फल)
किकियानाकुत्ते का दर्द से चीखना
बारजोईरूसी शिकारी कुत्तों की एक नस्ल
विजय-पताकाजीत का झंडा
हर्जानाक्षतिपूर्ति, नुकसान का मुआवज़ा
तर्जनीअँगूठे के पास वाली उँगली
अनुशासननियम-कायदे का पालन
गुज़ारिशनिवेदन, प्रार्थना
बावर्चीरसोइया
खँखारनागला साफ़ करना
तमाशबीनतमाशा देखने वाले लोग