कारतूस — हबीब तनवीर (एकांकी)
पाठ्यपुस्तक: स्पर्श भाग-2 | विधा: एकांकी (एक अंक का नाटक) | कोड 085, हिंदी पाठ्यक्रम-ब
लेखक परिचय
हबीब तनवीर (1923–2009) का जन्म रायपुर (छत्तीसगढ़) में हुआ। वे हिंदी-उर्दू रंगमंच के शीर्ष नाटककार, कवि, अभिनेता और निर्देशक थे। उन्होंने 'नया थिएटर' नामक नाट्य-संस्था बनाकर छत्तीसगढ़ के लोक-कलाकारों के साथ लोकनाट्य शैली को आधुनिक रंगमंच से जोड़ा। 'आगरा बाज़ार', 'चरनदास चोर', 'देख रहे हैं नैन' उनकी प्रसिद्ध नाट्य-कृतियाँ हैं। उन्हें पद्मश्री, पद्मभूषण और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार सहित अनेक सम्मान मिले। प्रस्तुत एकांकी 'कारतूस' अवध के जाँबाज़ सिपाही वज़ीर अली के साहस की ऐतिहासिक झलक प्रस्तुत करती है।
पृष्ठभूमि
यह घटना सन् 1799 के आसपास की है। अवध के नवाब आसिफ़उद्दौला की मृत्यु के बाद उनके बेटे वज़ीर अली को अवध की गद्दी मिली, पर वह अंग्रेज़ों का कट्टर विरोधी था। इसलिए कंपनी सरकार ने केवल कुछ महीनों में ही उसे गद्दी से हटाकर उसके चाचा (आसिफ़उद्दौला के भाई) सआदत अली को अवध का नवाब बना दिया — क्योंकि सआदत अली अंग्रेज़ों का दोस्त था और उसने उन्हें अपनी आधी दौलत और दस लाख रुपये दे दिए। वज़ीर अली को बनारस भेज दिया गया और तीन लाख रुपया सालाना वज़ीफ़ा तय हुआ। बाद में गवर्नर जनरल ने उसे कलकत्ता बुलाया; वकील की बदज़बानी से क्रुद्ध होकर वज़ीर अली ने उसका क़त्ल कर दिया और आज़मगढ़ के बाद गोरखपुर के जंगलों में भटकते हुए अंग्रेज़ों से लोहा लेता रहा।
विस्तृत सारांश
1. खेमे में कर्नल और लेफ़्टीनेंट की बातचीत
गोरखपुर के जंगल में कर्नल कालिंज का खेमा (कैंप) लगा है। पूरी फ़ौज वहाँ हफ़्तों से डेरा डाले है, फिर भी वज़ीर अली हाथ नहीं आ रहा। लेफ़्टीनेंट हैरान है कि एक अकेले आदमी को पकड़ने के लिए इतनी बड़ी फ़ौज क्यों लगी है। कर्नल बताता है कि वज़ीर अली साधारण आदमी नहीं — वह टीपू सुल्तान की तरह अंग्रेज़ों का कट्टर दुश्मन है, जाँबाज़ है और जंगल में वर्षों से कामयाबी से छिपा घूम रहा है। उसकी आज़ादी-पसंदी की मिसाल देते हुए कर्नल कहता है कि उसके अफ़साने (किस्से) सुनकर रॉबिनहुड की याद आ जाती है।
2. वज़ीर अली की योजनाएँ और कंपनी का डर
कर्नल बताता है कि वज़ीर अली, टीपू सुल्तान और बंगाल के नवाब के भाई शमसुद्दौला — सभी अंग्रेज़ों के विरुद्ध एकजुट होने की योजना में थे; वे अफ़ग़ानिस्तान के बादशाह शाहे-ज़मा को हिंदुस्तान पर हमले की दावत दे चुके थे। यदि यह योजना सफल हो जाती तो कंपनी के पाँव हिंदुस्तान से उखड़ जाते। वज़ीर अली की योजना है कि किसी तरह नेपाल पहुँच जाए, वहाँ से अपनी ताक़त बढ़ाकर, अफ़ग़ानी हमले के साथ मिलकर अवध पर धावा बोले और अंग्रेज़ों को हिंदुस्तान से निकाल दे। इसीलिए उसे ज़िंदा या मुर्दा पकड़ना कंपनी के लिए ज़रूरी है।
3. सवार का आगमन
तभी एक गोरा सिपाही ख़बर देता है कि दूर धूल उड़ती दिखाई दे रही है — एक घुड़सवार खेमे की ओर ही आ रहा है। कर्नल सतर्क हो जाता है। सवार बेधड़क खेमे में दाखिल होता है और कर्नल से अकेले में बात करने की इच्छा जताता है। लेफ़्टीनेंट को बाहर भेज दिया जाता है। सवार कहता है कि वह वज़ीर अली को गिरफ़्तार करने की मुहिम में है, जंगल का एक-एक कोना जानता है — बस उसे दस कारतूस चाहिए। कर्नल उसे कारतूस दे देता है।
4. चौंकाने वाला अंत
कारतूस लेकर सवार कहता है — "ये कारतूस किसलिए दिए, यह भी बता दूँ… अपनी जान बख़्शने के लिए।" कर्नल के पूछने पर कि तुम कौन हो, वह गरजकर उत्तर देता है — "वज़ीर अली!" — और यह भी कि तुम्हारी गर्दन मुट्ठी में होते हुए भी मैंने तुम्हारी जान बख़्शी है। इतना कहकर वह बाहर निकलता है और पलक झपकते ही घोड़े की टापों की आवाज़ दूर हो जाती है। हक्का-बक्का कर्नल के मुँह से केवल इतना निकलता है — "एक जाँबाज़ सिपाही!" दुश्मन तक उसके साहस का लोहा मान लेता है — यही इस एकांकी का चरम-बिंदु है।
पात्र-परिचय
- वज़ीर अली — अवध का अपदस्थ नवाब; निडर, जाँबाज़, हाज़िरजवाब और देशभक्त। अंग्रेज़ों का कट्टर शत्रु, पर उदार इतना कि गर्दन मुट्ठी में होने पर भी कर्नल की जान बख़्श देता है। दुश्मन के खेमे में घुसकर उसी से कारतूस ले आना उसके अद्भुत आत्मविश्वास और सूझबूझ का प्रमाण है। कर्नल उसकी तुलना रॉबिनहुड से करता है।
- कर्नल कालिंज — अंग्रेज़ी फ़ौज का अफ़सर; वज़ीर अली को पकड़ने की मुहिम का नेतृत्व करता है। शत्रु होते हुए भी वज़ीर अली के कारनामों का प्रशंसक — अंत में उसे 'जाँबाज़ सिपाही' कहकर श्रद्धा व्यक्त करता है।
- लेफ़्टीनेंट — कर्नल का सहायक अधिकारी; जिज्ञासु, जो प्रश्न पूछ-पूछकर दर्शकों/पाठकों तक वज़ीर अली की पृष्ठभूमि पहुँचाने का नाट्य-माध्यम बनता है।
- सआदत अली — वज़ीर अली का चाचा; ऐशपसंद और अंग्रेज़ों का मित्र, जिसने आधी दौलत और दस लाख रुपये देकर अवध की गद्दी पाई — स्वार्थी देशद्रोही प्रवृत्ति का प्रतीक।
- गोरा सिपाही — सवार के आने की सूचना देने वाला सैनिक।
संदेश / उद्देश्य
- देश की आज़ादी के लिए जान की बाज़ी लगाने वाले वज़ीर अली जैसे जाँबाज़ों के त्याग और साहस का स्मरण।
- सच्चा वीर शत्रु के प्रति भी उदार होता है — अवसर मिलने पर भी वज़ीर अली ने कर्नल की हत्या नहीं की।
- सआदत अली जैसे स्वार्थी, विलासी और देशद्रोही चरित्रों की भर्त्सना — निजी लाभ के लिए विदेशी सत्ता से हाथ मिलाना देश के साथ विश्वासघात है।
- साहस, आत्मविश्वास और सूझबूझ से असंभव कार्य भी संभव बनाए जा सकते हैं।
कठिन शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| कारतूस | बंदूक की गोली (कार्ट्रिज) |
| एकांकी | एक अंक वाला नाटक |
| खेमा | डेरा, कैंप, तंबू |
| जाँबाज़ | जान की बाज़ी लगाने वाला, अत्यंत साहसी |
| अफ़साना | कहानी, किस्सा |
| कारनामा | साहसिक/अद्भुत कार्य |
| वज़ीफ़ा | गुज़ारे के लिए बँधी हुई रकम, भत्ता |
| मसलेहत | रहस्य, गूढ़ कारण/हित की बात |
| गर्द | धूल |
| काफ़िला | यात्रियों का समूह |
| शुजाउद्दौला/आसिफ़उद्दौला | अवध के नवाबों के नाम |
| ऐशपसंद | विलासी, भोग-विलास पसंद करने वाला |
| मुक़र्रर | तय, नियुक्त |
| हुकूमत | शासन, सरकार |
| बख़्शना | क्षमा करना, छोड़ देना |
| तख़्त | राजगद्दी |